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Thursday, 5 March 2026

समय के विरुद्ध एक स्पर्श

 समय के विरुद्ध एक स्पर्श


समय

सब कुछ धीरे-धीरे बदल देता है

चेहरों की चमक,

शब्दों की गर्माहट,

स्मृतियों की तीव्रता।


वह

हर क्षण को

अतीत में बदलने की

एक शांत कला जानता है।


हम उसके सामने

अक्सर असहाय होते हैं

जैसे रेत की मुट्ठी

धीरे-धीरे

उँगलियों से फिसलती रहती है।


पर कभी-कभी

एक छोटा-सा स्पर्श

समय के विरुद्ध

खड़ा हो जाता है।


जब तुम्हारी उँगलियाँ

मेरी उँगलियों को छूती हैं,

तो लगता है

मानो उस क्षण

घड़ी की सुइयाँ

थोड़ी देर के लिए ठहर गई हों।


उस स्पर्श में

न भविष्य की चिंता होती है,

न अतीत की परछाईं

बस

एक पूर्ण वर्तमान होता है।


तब समझ आता है

समय

सिर्फ़ बहता नहीं,

कभी-कभी

ठहर भी जाता है।


और वह ठहराव

किसी सिद्धांत से नहीं,

एक सच्चे स्पर्श से जन्म लेता है।


शायद इसलिए

प्रेम का सबसे गहरा चमत्कार

यही है


कि इस अनंत समय में

जहाँ सब कुछ बदलता रहता है,


वहाँ

दो हथेलियों का मिलना

एक क्षण के लिए

अनंत बन जाता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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